Es Brother Ne Es Tra di Video Share keeti ke dekh ke ho jaoge heran

ज़माना फ़ेसबुक का है. लोग एक दूसरे से जुड़े रहते हैं. और ज़्यादा ख़ास बात हो तो लोग अगले को मैसेंजर पर पर्सनल मैसेज भी करते हैं. लल्लनटॉप के फ़ेसबुक पेज पर भी हमें लगातार ऐसे मैसेज मिलते हैं. काम की आपाधापी में न्यूज़रूम व्यस्त रहता है. फ़िर भी दिन में समय निकालकर हम मैसेज देख ही लेते हैं. ऐसे ही जब आज मैसेंजर पर आए मैसेज हम पढ़ रहे थे तो हमारे एक पाठक साथी के मैसेज पर नज़र गई. उन्होंने हमें बताया कि कैसे उन्होंने अपनी छोटी बहन के मन में पीरियड्स को लेकर बनाई कुरीति को तोड़ा. उन्होंने अपने ट्विटर हैंडल का एक लिंक शेयर किया था. जब हमने वीडियो देखा तो सोचा क्यों न ये प्यारी सी मगर बेहद ज़रूरी बात अपने सभी पाठकों से शेयर की जाए.ट्विटर पर 40 सेकेण्ड के इस वीडियो को अपने ट्विटर हैंडल से पोस्ट किया है हमारे एक पाठक साथी ने. नाम है अभिषेक वॉल्टर.वीडियो के बारे में आगे बात करें इससे पहले एक डरावनी तस्वीर देख लीजिए. तस्वीर इसी दुनिया की है. जहां महिलाओं को पीरियड यानि माहवारी के दौरान घर से बाहर निकाल दिया जाता है. महिला इतनी गंदी और तंग जगह में रहती है, जिसकी आप कल्पना भी नहीं कर सकते. खूंखार अपराधियों को जेल में सज़ा के तौर पर जो चार हाथ चौड़ा ‘अंडा सेल’ दिया जाता है, वो भी इससे ज़्यादा ठीक होगा.अपनी बहन के दिमाग़ से अंधविश्वास की काई हटाने के लिए भाई ने जो किया उस पर कोई भी कहेगा ‘वेल डन’. लेकिन क्या ये प्यारा सा वीडियो देखने के बाद, हम अपनी बहन समेत उन आस-पास की तमाम महिलाओं से ‘पीरियड’ पर बात कर सकते हैं? समझाइश दे सकते हैं? जो हर दिन हमारे घरों, दफ़्तरों, कॉलेजों में शर्म से झेंपती नज़र आती हैं, सिर्फ़ इसलिए क्योंकि उनकी माहवारी चल रही है.

आपके मन में जो जवाब अभी आया है उसमें पश्चाताप कम, शर्म ज़्यादा है. माना कि हमारे समाज के पांव में डाली गई ये बेड़ियां पुरानी हैं, मज़बूत हैं. लेकिन अभिषेक जैसे भाइयों, बेटों, पतियों और दोस्तों की कोशिशें ही इस फ़ौलाद को पिघला सकती हैं. चाहे इसमें बरसों लग जाएं.

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